Saturday, June 29, 2019

नाम के चौकीदार और काम के चौकीदार


काम के चौकीदार जो सुबह तैयार होकर तय समय से पहले ही ड्यूटी पर पहुँच जाता है ओ इस लिए की कही मालिक नाराज न हो जाये और सुबह से लेकर शाम तक लगभग 8-10 घंटे रोज तीस दिन तक बराबर ड्यूटी करता है तब जाकर उसको 8-10 रूपये वेतन के रूप में मिलता है और उसी से अपने घर के बच्चों की बढ़ाई घर का राशन जैसे अपने सारे जरूरतों को पूरा करता है।
नाम के चौकीदार जिनके सोकर उठने कोई समय ही नहीं रहता और ड्यूटी का भी कोई समय सीमा निर्धारित नहीं रहती और वेतन तो उतने जितने 5-6 काम के चौकीदार कार्य कर सकते है और उनकी सारी जरूरते तो सरकार पूरी करती है किसी चीज से इनको फर्क नहीं पड़ती।






आइए जानते हैं सांसदों को कितना वेतन और भत्ता मिलता है

1.  लोकसभा और राज्यसभा के सांसद कार्यकाल के दौरान 50 हजार रुपये का वेतन मिलता है.
2.  अगर सांसद की कार्यवाही के दौरान उसमें शामिल होते हैं, और रजिस्टर में हस्ताक्षर करते हैं तो उन्हें 2000 रुपये हर रोज का भत्ता मिलता है.
एक सांसद अपने क्षेत्र में कार्य कराने के लिए 45000 रुपये प्रतिमाह भत्ता पाने का हकदार होता है.
3.  कार्यालयीन खर्चों के लिए एक सांसद को 45000 रुपये प्रतिमाह मिलता है. इसमें से वह 15 हजार रुपये स्टेशनरी पर खर्च कर सकता है. इसके अलावा अपने सहायक रखने पर सांसद 30 हजार रुपये खर्च कर सकता है.
4.  सांसद निधि (मेंबर ऑफ पार्लियामेंट लोकल एरिया डेवलपमेंट) स्कीम के तहत सांसद अपने क्षेत्र में 5 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष का खर्च करने की सिफारिश कर सकता है.
5.  सांसदों को हर तीन महीने में 50 हजार रुपये यानी करीब 600 रुपये रोज घर के कपड़े धुलवाने के लिए मिलते हैं.
6.  सांसदोंको हवाई यात्रा का 25 प्रतिशत ही देना पड़ता है. इस छूट के साथ एक सांसद सालभर में 34 हवाई यात्राएं कर सकता है. यह सुविधा पति/पत्नी दोनों के लिए है.
7.  ट्रेन में सांसद फर्स्ट क्लास एसी में अहस्तांतरणीय टिकट पर यात्रा कर सकता है. उन्हें एक विशेष पास दिया जाता है.
8.  एक सांसद को सड़क मार्ग से यात्रा करने पर 16 रुपये प्रतिकिलोमीटर यात्रा भत्ता मिलता है.

Thursday, April 18, 2019

हम समय के तरासे हुए व्यक्तित्व हैं

                                   
                                            मैं डॉ आर एस पटेल संयोजक सरदार सेना  उत्तर प्रदेश के वाराणसी जनपद के छोटे से गांव के किसान के बेटा हूँ। मैंने देखा देश जिनकी वजह से एक हो सका जिनके कारण अखंड भारत का निर्माण संभव हुआ ऐसे महापुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल के वंशज अब तक अशिक्षा गरीबी और अवसरहीनता से मुक्त नहीं हो सका पूरे देश में सिर्फ विकास की बात होती रही पर हम जिस हाल में थे यह सच्चाई कोई नहीं बतलाता तब मुझे यह चाह हुई की हमें समाज को स्थापित करना होगा।

 मैं खुद पेशेवर डॉक्टर जो दिन में 400 से 500 मरीजों को देखता चाहता तो मैं अपना जीवन अच्छे से यापन कर सकता था मुझे किसी चीज की तनिक भी कमी नहीं लेकिन समाज में देखने के बाद जो दर्द दिल में जगा मुझे लगा ऐसे बदलाव नहीं हो सकता इसलिए समाज नीति को चुना और अपने समाज को जगाने का शपथ लिया और लगातार अपने समाज के बीच जाकर सरदार वादी विचारधारा को पहुंचाने का निर्णय लिया लेकिन कुछ अराजक लोग जो मेरी कम उम्र और अनुभवहीनता पर लगातार सवाल उठाते रहे मगर कोई भी सब सीख कर नहीं आता ऐसा कहा जाता है.

 परिस्थितियां सब सिखा देती हैं और हम समय के तरासे हुए व्यक्तित्व हैं हमें इनका कोई फर्क नहीं पड़ता हमें समाज ने जो अवसर दिया है. उसको हमने समाज के लिए न्योछावर कर दिया है अब बस एक ही लक्ष्य है हमारा कि समाज देश में स्थापित हो इसके लिए जो कुछ करना होगा हमें स्वीकार्य है।


Monday, April 15, 2019

आजमगढ़ में बैकवर्ड आरक्षण बढ़ाओ जनान्दोलन की बैठक सम्पन्न,


धूमधाम से मनाई गई महामानव बहुजनो के शिक्षा के अग्रदूत,ज्योतिराव फूले एवं संविधान निर्माता डॉक्टर भीमराव अंबेडकर जी की जयंती।
गूंजा "27न बटनें देंगे--57अब लेकर रहेंगे"
"अब नही सहेंगे अत्याचार--लेकर रहेंगे अपना अधिकार"


आजमगढ़। आज जनपद के रोहुआर स्थित छत्रपति शिवाजी इंटर कॉलेज के प्रांगण में सरदार सेना द्वारा आयोजित बैकवर्ड आरक्षण बढ़ाओ जन आंदोलन की बैठक अनिरुद्ध पटेल तथा विद्यासागर पटेल व मनोज पटेल के नेतृत्व में संपन्न हुई। इस बैठक में आजमगढ़ के कई ब्लॉकों से क्रांतिकारी सामाजिक नेता मौजूद रहे।
इस अवसर पर सब ने संकल्प लिया कि अपने आरक्षण की लड़ाई के लिए हम सभी तन मन धन लगा कर लड़ेंगे और जीतेंगे साथ ही सभी ने यह संकल्प लिया कि बीजेपी और उसके सहयोगियों को हम ना वोट देंगे न दिलाएंगे ।
इस अवसर पर आए हुए सैकड़ों की तादात में क्रांतिकारियों का सरदार सेना परिवार आभार व्यक्त करता है।


Sunday, March 17, 2019

सरदार सेना की मासिक समीक्षा बैठक संपन्न

सरदार सेना की मासिक समीक्षा बैठक संपन्न, लिया कई अहम निर्णय,भाजपा व सहयोग दलों को वोट न देने का सर्वसम्मति से हुआ निर्णय...!
लखनऊ.... सरदार सेना सामाजिक संगठन का रविवार को मासिक समीक्षा बैठक प्रदेश के राजधानी लखनऊ में सम्पन्न हुआ। बैठक में प्रदेश भर के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान पदाधिकारियों के पिछले माह के कार्यों की समीक्षा लेते हुए कई अहम निर्णय सर्वसम्मति से लिया गया जिसके कुछ अंश निम्नवत हैं।



1)लोकसभा चुनाव में किसी भी दल या निर्दल में ब्राह्मण प्रत्याशी को सरदार सेना के लाखों कार्यकर्ता वोट नहीं करेंगे।
2)RSS द्वारा संचालित भाजपा व उनके गठबंधन के किसी भी प्रत्याशी को वोट नहीं करेंगे क्योंकि बीते 5 वर्षों में भाजपा सरकार ने हर जगह ओबीसी के अधिकारों पर कुठाराघात घात किया है।
3)बीजेपी या उसके गठबंधन के प्रत्याशियों को छोड़कर किसी भी दल या निर्दल के ओबीसी,एससी,एसटी व माइनॉरिटी के वह प्रत्याशी जो सदन में जाकर ओबीसी के संपूर्ण अधिकारों की लड़ाई लड़ने का काम करेंगा,हम उनको समर्थन देकर अपने लाखो सदस्यों द्वारा वोट दिलवाकर सदन में भेजने का काम करेंगे लेकिन उपरोक्त मुद्दों पर प्रत्याशी महोदय को संकल्प पत्र भरना होगा।


इस बैठक में सरदार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ आर एस पटेल ने अपने समस्त कार्यकर्ताओं को यह भी निर्देशित किया कि उपरोक्त बातों के लिए ओबोसी समाज के करोड़ों साथियों के बीच जल्द से जल्द जन जन जागृत करके समझया जाय।
बैठक में अपने पदाधिकारियों का मनोबल ऊंचा करते हुए कहा कि आप सभी ने पिछले दिनों में 13 पाइंट रोस्टर एवं लेखपाल भर्ती आदि को लेकर जो जनांदोलन किया उससे सरकार को यूटर्न लेना पड़ा और आपकी बात को मानना पड़ा जिसके लिए हम आप सभी का आभार व्यक्त करते हैं साथ ही आप सभी के सहयोग से सरदार सेना सामाजिक संगठन का तेजी से विस्तार हुआ है। इस संगठन के विस्तार हेतु हमे आगे भी निरन्तर संघर्ष करना होगा। ताकि हम अपने हक व अधिकारों से वंचित न रह सकें और सही मायने में समाज को न्याय दिलाया जा सके।

Tuesday, March 12, 2019

'भाई साहब, पुलिस को थोड़ा टाइम तो दोगे, कि नहीं?'


उत्तर प्रदेश
बुलंदशहर में रविवार को चार लोगों ने चलती हुई कार में एक नाबालिग लड़की के साथ रेप किया.15 साल की पीड़िता अभी अस्पताल में भर्ती है अभी तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हुई है.

जब पुलिस से पूछा गया कि घटना के 48 घंटे बाद भी आरोपियों को गिरफ्तार क्यों नहीं किया गया, तो एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी से पूछा गया तो वे बोलते है 'भाई साहब, पुलिस को थोड़ा टाइम तो दोगे, कि नहीं?'

ये है हमरे देश में बेटियों की सुरक्षा न्याय कहा है साहब न्याय मांगते मांगते तो लोंगो को कइयों जनम लेने पड़ेंगे

Monday, February 11, 2019

लौह पुरुष वल्ल्भ भाई पटेल को सरदार की उपाधि



बारदोली सत्याग्रह गुजरात के सूरत जिले में किसानों द्वारा 4 फरवरी 1928 ई. में 'लगान न देने' के लिए किया गया। इसका नेतृत्व "सरदार वल्लभ भाई पटेल" द्वारा किया गया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नरमपंथी नेताओं ने इस अहिंसक आन्दोलन का समर्थन 'सर्वेन्ट ऑफ इण्डिया सोसायटी' के माध्यम से किया। इस आंदोलन में महिलाओं ने भी बड़े उत्साह से भाग लिया। जिसमें कस्तूरबा गांधी, मीठू बेन, भक्तिबा, मनीबेन पटेल, शरदाबेन शाह और शारदा मेहता का नाम प्रमुख है। कापिलराज नामक जनजाति के लोगों ने भी इस आन्दोलन में सहयोग दिया। क्योंकि किसानों की जमीन यही लोग जोता करते थे। लगान वृद्धि का प्रभाव इन पर भी पड़ रहा था। सरकार ने इस सत्याग्रह को कुचलने के लिए कठोर कदम उठाये किन्तु जनमत से बाध्य होकर उसे किसानों के आगे झुकना पड़ा। अन्ततः सरकार ने एक न्यायिक अधिकारी 'ब्लूमफील्ड' तथा एक राजस्व अधिकारी 'मैक्सवेल' से सम्पूर्ण मामले की जाँच करायी। जाँच में 22% (जो प्रारम्भ में 30% थी)  लगान वृद्धि को अनुचित बताया गया। अतः सरकार को लगान वृद्धि को घटाकर 6.03% करना पड़ा। यह आन्दोलन पूरी तरह अहिंसक और सफल रहा। बारदोली सत्याग्रह के सफल होने के बाद बारदोली की महिलाओं की तरफ से गांधी जी ने वल्लभ भाई पटेल को "सरदार" की उपाधि प्रदान की।

बारदोली सत्याग्रह क्यों हुआ







    बारदोली आन्दोलन का मुख्य कारण सरकार द्वारा की गयी लगान में 22% (जो प्रारम्भ में 30% थी) की वृद्धि था। जिसका विरोध किसानों ने किया और किसान समिति के सदस्य और स्थानीय नेता वल्लभ भाई पटेल को बारदोली आने का आमंत्रण दिया। 4 फरवरी 1928 को वल्लभ भाई पटेल ने इस किसान आन्दोलन का नेतृत्व संभाला और इसे 'बारदोली सत्याग्रह' नाम दिया। 'हाली पद्धति' के शिकार लोगों ने भी इस आन्दोलन में सहयोग किया। क्योंकि बारदोली के किसानों की जमीन यही लोग बटाई पर जोता करते थे। अतः लगान वृद्धि का उनकी आमदनी पर भी प्रभाव पड़ रहा था। 'हाली पद्धति' एक प्रकार की "बन्धुआ मजदूरी" थी। जिसे कापिलराज नामक जनजाति के लोग करने के लिए विवश थे। इन्हें 'दुबला आदिवासी' भी कहा जाता था।

बारदोली आन्दोलन की पृष्ठभूमि

    बारदोली क्षेत्र के 137 गांवों के लगभग 87 हजार किसान 1908 ई. में मेहता बन्धुओं (कुँवरजी मेहता तथा कल्याणजी मेहता) के नेतृत्व में संगठित होने लगे थे। इस संगठन ने पाटीदार युवक मंडल तथा पटेल बन्धु नामक पत्रिकाओं का प्रकाशन भी किया। जब वर्ष 1926 ई. में सरकार ने लगान की दर 30% बढ़ा दी। तो किसानों ने इसका जबरदस्त विरोध किया और लगान में कमी करने हेतु 1927 ई. में भीम भाई नाइक तथा शिवदासानी के नेतृत्व एक प्रतिनिधि मण्डल बम्बई के राजस्व विभाग के प्रमुख से मिलने भेजा। इस मण्डल के प्रयासों से सरकार ने जुलाई 1927 ई. में लगान वृद्धि को 30% से घटाकर 22% कर दिया। किन्तु किसान इससे सन्तुष्ट नहीं हुए और विरोध जारी रखने का फैसला लिया। उन्होंने वल्लभ भाई पटेल जो खेड़ा सत्याग्रह, नागपुर फ्लैग मार्च सत्याग्रह और बलखाड़ सत्याग्रह के कारण लोगों के बीच लोकप्रिय हो चले थे, इस आन्दोलन का नेतृत्व करने के लिए आमंत्रित किया। 4 फरवरी 1928 ई. में पटेल ने इस आन्दोलन का नेतृत्व संभाला और 'बारदोली सत्याग्रह' नाम दिया।

कापिलराज और हाली पद्धति

    कापिलराज एक जनजाति थी। जो अपने जीवन पोषण के लिए बारदोली में कुनबी पाटीदारों (किसानों) के यहां खेती करने के लिए विवश थी। यह एक प्रकार की 'बन्धुआ मजदूरी' थी। जिसे "हाली पद्धति" कहा जाता था। उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय थी। इनकी आबादी बारदोली तालुका में 60% थी। स्थानीय नेता कल्याणजी मेहता, कुँवरजी मेहता, दयालजी देशाई, केशवजी आदि द्वारा इनमें चेतना जगाने का प्रयास किया गया। कुंवरजी मेहता तथा केशवजी ने शिक्षित कापिलराज के लोगों की सहायता से "कापिलराज साहित्य" का सृजन किया और हाली पद्धति के खिलाफ आवाज उठायी। 1922 के बाद यहाँ इस जनजाति के उत्थान के लिए प्रत्येक वर्ष कापिलराज सम्मेलन का आयोजन प्रारम्भ किया। 1927 के कापिलराज सम्मेलन की अध्यक्षता गाँधी जी ने की थी। इसी सम्मेलन में गांधी जी ने कापिलराज का नाम बदलकर रानीपराज (बनवासी) रखा। प्रसिद्ध नेता नरहरि पारीख तथा जगतराम दवे ने हाली पद्धति के अमानवीय चहरों को सामने रखा तथा इसे समाप्त करने के लिए बारदोली सत्याग्रह में आवाज उठायी।

Sunday, February 10, 2019

सरदार सेना का बैकवर्ड आरक्षण बढ़ाओ जनआंदोलन पुलिसया नोक झोंक के बीच हुआ संपन्न, उमड़ा जनसैलाब









वाराणसी।  जनपद के पटेल तालाब कोरोता से हजारों बाइक, सैकड़ों चार पहिया के साथ हजारों ओबीसी साथियों के साथ पैदल जुलूस बढ़ते हुए लगभग 19 किलोमीटर चलकर मुख्यालय पहुंचकर डीएम के प्रतिनिधि एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया।
बताते चलें कि सरदार सेना सामाजिक संगठन बैकवर्ड आरक्षण बढ़ाओ जन आंदोलन "27न बटनें देंगे --57 अब लेके रहेंगे" के साथ ही 13 पॉइंट रोस्टर के खिलाफ बस्ती अंबेडकरनगर कानपुर के बाद आज वाराणसी के सड़को पर महाआंदोलन छेड़ दिया।पीएम का संसदिय क्षेत्र पूरी तरह जाम हो चुका था । इस बीच कई जगह प्रशासन के लोगों ने नोकझोंक करते हुए आंदोलन को रोकने का प्रायस किया । हद तो तब हो गई जब ज्ञापन सौंपने के लिए हम हजारों साथी इंतजार करते रहे, डीएम के ना आने पर मजबूरन हमें कचहरी मुख्य मार्ग को जाम करना पड़ा तदुपरांत सक्षम अधिकारी आए।तब 13 प्वाइंट रोस्टर और बैकवर्ड आरक्षण विभाजन के मुद्दे को लेकर महामहिम राष्ट्रपति एवं महामहिम राज्यपाल को नामित ज्ञापन सौंपा गया ।
साथियों यह बता देना जरूरी है की अभी तो यह शुरुआत है अभी महाआंदोलन बाकी है संपूर्ण बैकवर्ड का अधिकार सामन्तवादियों से हम छीन कर आप लोगों की झोली में डालने को तैयार हैं ।
इस आंदोलन में आए हुए हजारों क्रांतिकारी साथियों को मैं तहे दिल से आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित करता हूं।