Monday, February 11, 2019

लौह पुरुष वल्ल्भ भाई पटेल को सरदार की उपाधि



बारदोली सत्याग्रह गुजरात के सूरत जिले में किसानों द्वारा 4 फरवरी 1928 ई. में 'लगान न देने' के लिए किया गया। इसका नेतृत्व "सरदार वल्लभ भाई पटेल" द्वारा किया गया। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नरमपंथी नेताओं ने इस अहिंसक आन्दोलन का समर्थन 'सर्वेन्ट ऑफ इण्डिया सोसायटी' के माध्यम से किया। इस आंदोलन में महिलाओं ने भी बड़े उत्साह से भाग लिया। जिसमें कस्तूरबा गांधी, मीठू बेन, भक्तिबा, मनीबेन पटेल, शरदाबेन शाह और शारदा मेहता का नाम प्रमुख है। कापिलराज नामक जनजाति के लोगों ने भी इस आन्दोलन में सहयोग दिया। क्योंकि किसानों की जमीन यही लोग जोता करते थे। लगान वृद्धि का प्रभाव इन पर भी पड़ रहा था। सरकार ने इस सत्याग्रह को कुचलने के लिए कठोर कदम उठाये किन्तु जनमत से बाध्य होकर उसे किसानों के आगे झुकना पड़ा। अन्ततः सरकार ने एक न्यायिक अधिकारी 'ब्लूमफील्ड' तथा एक राजस्व अधिकारी 'मैक्सवेल' से सम्पूर्ण मामले की जाँच करायी। जाँच में 22% (जो प्रारम्भ में 30% थी)  लगान वृद्धि को अनुचित बताया गया। अतः सरकार को लगान वृद्धि को घटाकर 6.03% करना पड़ा। यह आन्दोलन पूरी तरह अहिंसक और सफल रहा। बारदोली सत्याग्रह के सफल होने के बाद बारदोली की महिलाओं की तरफ से गांधी जी ने वल्लभ भाई पटेल को "सरदार" की उपाधि प्रदान की।

बारदोली सत्याग्रह क्यों हुआ







    बारदोली आन्दोलन का मुख्य कारण सरकार द्वारा की गयी लगान में 22% (जो प्रारम्भ में 30% थी) की वृद्धि था। जिसका विरोध किसानों ने किया और किसान समिति के सदस्य और स्थानीय नेता वल्लभ भाई पटेल को बारदोली आने का आमंत्रण दिया। 4 फरवरी 1928 को वल्लभ भाई पटेल ने इस किसान आन्दोलन का नेतृत्व संभाला और इसे 'बारदोली सत्याग्रह' नाम दिया। 'हाली पद्धति' के शिकार लोगों ने भी इस आन्दोलन में सहयोग किया। क्योंकि बारदोली के किसानों की जमीन यही लोग बटाई पर जोता करते थे। अतः लगान वृद्धि का उनकी आमदनी पर भी प्रभाव पड़ रहा था। 'हाली पद्धति' एक प्रकार की "बन्धुआ मजदूरी" थी। जिसे कापिलराज नामक जनजाति के लोग करने के लिए विवश थे। इन्हें 'दुबला आदिवासी' भी कहा जाता था।

बारदोली आन्दोलन की पृष्ठभूमि

    बारदोली क्षेत्र के 137 गांवों के लगभग 87 हजार किसान 1908 ई. में मेहता बन्धुओं (कुँवरजी मेहता तथा कल्याणजी मेहता) के नेतृत्व में संगठित होने लगे थे। इस संगठन ने पाटीदार युवक मंडल तथा पटेल बन्धु नामक पत्रिकाओं का प्रकाशन भी किया। जब वर्ष 1926 ई. में सरकार ने लगान की दर 30% बढ़ा दी। तो किसानों ने इसका जबरदस्त विरोध किया और लगान में कमी करने हेतु 1927 ई. में भीम भाई नाइक तथा शिवदासानी के नेतृत्व एक प्रतिनिधि मण्डल बम्बई के राजस्व विभाग के प्रमुख से मिलने भेजा। इस मण्डल के प्रयासों से सरकार ने जुलाई 1927 ई. में लगान वृद्धि को 30% से घटाकर 22% कर दिया। किन्तु किसान इससे सन्तुष्ट नहीं हुए और विरोध जारी रखने का फैसला लिया। उन्होंने वल्लभ भाई पटेल जो खेड़ा सत्याग्रह, नागपुर फ्लैग मार्च सत्याग्रह और बलखाड़ सत्याग्रह के कारण लोगों के बीच लोकप्रिय हो चले थे, इस आन्दोलन का नेतृत्व करने के लिए आमंत्रित किया। 4 फरवरी 1928 ई. में पटेल ने इस आन्दोलन का नेतृत्व संभाला और 'बारदोली सत्याग्रह' नाम दिया।

कापिलराज और हाली पद्धति

    कापिलराज एक जनजाति थी। जो अपने जीवन पोषण के लिए बारदोली में कुनबी पाटीदारों (किसानों) के यहां खेती करने के लिए विवश थी। यह एक प्रकार की 'बन्धुआ मजदूरी' थी। जिसे "हाली पद्धति" कहा जाता था। उनकी स्थिति अत्यंत दयनीय थी। इनकी आबादी बारदोली तालुका में 60% थी। स्थानीय नेता कल्याणजी मेहता, कुँवरजी मेहता, दयालजी देशाई, केशवजी आदि द्वारा इनमें चेतना जगाने का प्रयास किया गया। कुंवरजी मेहता तथा केशवजी ने शिक्षित कापिलराज के लोगों की सहायता से "कापिलराज साहित्य" का सृजन किया और हाली पद्धति के खिलाफ आवाज उठायी। 1922 के बाद यहाँ इस जनजाति के उत्थान के लिए प्रत्येक वर्ष कापिलराज सम्मेलन का आयोजन प्रारम्भ किया। 1927 के कापिलराज सम्मेलन की अध्यक्षता गाँधी जी ने की थी। इसी सम्मेलन में गांधी जी ने कापिलराज का नाम बदलकर रानीपराज (बनवासी) रखा। प्रसिद्ध नेता नरहरि पारीख तथा जगतराम दवे ने हाली पद्धति के अमानवीय चहरों को सामने रखा तथा इसे समाप्त करने के लिए बारदोली सत्याग्रह में आवाज उठायी।

Sunday, February 10, 2019

सरदार सेना का बैकवर्ड आरक्षण बढ़ाओ जनआंदोलन पुलिसया नोक झोंक के बीच हुआ संपन्न, उमड़ा जनसैलाब









वाराणसी।  जनपद के पटेल तालाब कोरोता से हजारों बाइक, सैकड़ों चार पहिया के साथ हजारों ओबीसी साथियों के साथ पैदल जुलूस बढ़ते हुए लगभग 19 किलोमीटर चलकर मुख्यालय पहुंचकर डीएम के प्रतिनिधि एसडीएम को ज्ञापन सौंपा गया।
बताते चलें कि सरदार सेना सामाजिक संगठन बैकवर्ड आरक्षण बढ़ाओ जन आंदोलन "27न बटनें देंगे --57 अब लेके रहेंगे" के साथ ही 13 पॉइंट रोस्टर के खिलाफ बस्ती अंबेडकरनगर कानपुर के बाद आज वाराणसी के सड़को पर महाआंदोलन छेड़ दिया।पीएम का संसदिय क्षेत्र पूरी तरह जाम हो चुका था । इस बीच कई जगह प्रशासन के लोगों ने नोकझोंक करते हुए आंदोलन को रोकने का प्रायस किया । हद तो तब हो गई जब ज्ञापन सौंपने के लिए हम हजारों साथी इंतजार करते रहे, डीएम के ना आने पर मजबूरन हमें कचहरी मुख्य मार्ग को जाम करना पड़ा तदुपरांत सक्षम अधिकारी आए।तब 13 प्वाइंट रोस्टर और बैकवर्ड आरक्षण विभाजन के मुद्दे को लेकर महामहिम राष्ट्रपति एवं महामहिम राज्यपाल को नामित ज्ञापन सौंपा गया ।
साथियों यह बता देना जरूरी है की अभी तो यह शुरुआत है अभी महाआंदोलन बाकी है संपूर्ण बैकवर्ड का अधिकार सामन्तवादियों से हम छीन कर आप लोगों की झोली में डालने को तैयार हैं ।
इस आंदोलन में आए हुए हजारों क्रांतिकारी साथियों को मैं तहे दिल से आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित करता हूं।

Wednesday, January 30, 2019

आरक्षण हमार अधिकार है किसी के बाप की जागीर नहीं

             
आप सभी अवगत हो कि केन्द्र व राज्य सरकार की पिछड़ा व दलित विरोधी नीतियों के खिलाफ सरदार सेना सामाजिक संगठन लगातार संघर्षरत है। आप सभी जानते है कि भारत में ओबीसी वर्ग की सम्पूर्ण आबादी लगभग  57 या 60 प्रतिशत से ज्यादा है जिसके बावजूद बड़े संघर्षों के बाद इस वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण ही प्राप्त हुआ। लेकिन योगी सरकार द्वारा हाल ही में पिछड़े वर्ग के 27 प्रतिशत आरक्षण को भी विभाजित करके पिछड़े वर्ग को आरक्षण विहीन करने एवं आपस में लड़ाने हेतु बड़ा भयानक कुचक्र रचा गया है। जबकि हमारे ही दलित भाईयों को आबादी के अनुसार शुरू से ही 22.5% आरक्षण प्रभावी रूप से लागू है।  वहीं दूसरी तरफ बीते  09 जनवरी 2019 को मोदी सरकार द्वारा सवर्ण समाज हेतु जिनकी कुल आबादी लगभग 15% ही होने पर भी इन्हें10% आर्थिक आधार पर आरक्षण दे दिया गया जबकि सवर्ण समाज पहले से ही सामाजिक, शैक्षणिक व आर्थिक रूप से सम्पन्न है।  अत: मोदी सरकार द्वारा आर्थिक आधार पर आरक्षण का फार्मूला पूर्णतया अनैतिक एवं असंवैधानिक है।  ऐसा करके मोदी सरकार द्वारा संविधान में फेरबदल करने का कुत्सित प्रयास किया जा रहा है ऐसा करके मोदी ने देश के सम्पूर्ण पिछड़े समाज को और गहरे खाई में धकेलने का कार्य किया है।
               अत: अब पिछड़े समाज के लोंगो से गुजारिश है कि हमें मिलकर 27 नहीं बल्कि 57% से ज्यादा अपने आरक्षण  को बढ़ाने के लिए लड़ाई लड़नी होगी, नहीं तो हमारी आने वाली पीढ़ियां किसी भी संवैधानिक पदों पर स्थापित नहीं हो पायेगी और यदि हम इसी तरह हाथ पर हाथ धरे तमाशबीन बने रहे तो पुन: हम गुलामी की जंजीरों में जकड़ने को विवश होंगे। जिसके कारण निकट भविष्य में हमारी पीढ़ियां आत्महत्या करने पर मजबूर होंगी और हमें कदापि माफ नहीं करेगी। इसलिए आईये हम अपने बच्चों को अपने आबादी के अनुसार सरकारी,अर्द्धसरकारी अर्थात् संविदा जैसी निम्न से लेकर शीर्ष स्तर तक सम्पूर्ण नौकरियों तथा व्यवस्थाओं में स्थापित करने हेतु आजादी की दूसरी लड़ाई लड़कर अपने पीढ़ियों को संवैधानिक न्याय दिलाने का कार्य करें।
         बताते चले कि भाजपा सरकार ने लगभग अपने पांच वर्षों के कार्यकाल में हमारे अधिकारों पर लगातार कुठाराघात किया है, जिसके कुछ अंश निम्नवत् दिये जा रहे हैं-
1. 27 जून 2018 को उ. प्र. परिवहन निगम में कुल 127 पदों पर परिचालकों की भर्ती हुई, जिसमें 100 पदों पर सवर्ण वर्ग तथा 27 पद पर दलित वर्ग के लिए आरक्षित किया गया जिसमें ओबीसी आरक्षण को पूरी तरह समाप्त कर दिया गया।
2. केन्द्रीय विश्वविद्यालयों में विभागवार विखंडन कर नवीन रोस्टर प्रणाली लागू कर आरक्षण को पूर्ण रूप से निष्प्रभावी कर दिया गया।
3. केन्द्र सरकार के गलत नीतियों के कारण बीते वर्ष में ओबीसी के 9 हजार नीट में उत्तीर्ण बच्चों को मेडिकल में दाखिला लेने से रोक दिया गया।
4. बीते वर्ष में सिविल सर्विसेस में उत्तीर्ण 314 ओबीसी के बच्चों को क्रीमिलेयर लगाकर आईएएस अधिकारी बनने से रोक दिया गया।
5. सप्रीम कोर्ट के एक निर्णय के अनुसार केन्द्र सरकार ने असंवैधानिक तरीके से आरक्षित वर्गों के बच्चों को चाहे वह ओपेन कटेगरी के अनुसार टॉपर ही क्यों न रहा हो आगे बढ़ने से रोक दिया अर्थात् 85% आबादी वाले आरक्षित समाज को 49.5% के अन्दर सीमित करके 15% सवर्णों को 50.5% नौकरियों में कब्जा जमाने अर्थात् नंगा नाच करने की खुली छूट दे दिया।
6. बीते वर्ष गोरखपुर विश्वविद्यालय में विज्ञापित तमाम पदों पर 90 % से ज्यादा सवर्णों को स्थान दिया गया। इसी तरह देश भर के तमाम विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर, असिस्टेन्ट प्रोफेसर सहित तमाम पदों पर ओबीसी को जगह न देकर जातिवाद का नंगा नाच किया गया।
7. आंकड़ों के अनुसार केन्द्रीय मंत्रालयों में अवर सचिव/सचिव व निदेशक स्तर के 747 अफसरों में मात्र 17 अफसर ओबीसी समुदाय के हैं। इसी तरह हजारों उदाहरण है जहां ओबीसी वर्ग का प्रतिनिधित्व लगभग शून्य जैसा हो चुका है।
             साथियों अब हम पिछड़े वर्ग को अपने आबादी के अनुसार सम्पूर्ण अधिकार दिलाने हेतु आजादी की दूसरी लड़ाई लड़नी पड़ेगी नहीं तो हमारी आने वाली पीढ़ियां हमें माफ नहीं करेगी। इसलिए आईये इस महाआंदोलन में सहभागी बनकर अपने आने वाली पीढ़ियों को सम्पूर्ण अधिकार दिलाने हेतु लड़ाई लड़े।

Monday, January 7, 2019

बौद्धिक साथियों के साथ आरक्षण पर हुआ गहन चिंतन

वाराणसी  

आज जनपद के बड़ागांव ब्लाक अंतर्गत असवारी गांव में सरदार सेना के ब्लॉक आईटी प्रभारी पिंटू पटेल के नेतृत्व में बैठक संपन्न हुई । बैठक का संचालन सरदार सेना बौद्धिक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष भरत प्रजापति ने किया । इस अवसर पर सैकड़ों वकील व अध्यापक साथियों ने खुलकर चर्चा किया एवं सभी ने संकल्प लिया कि अब हम पिछड़े वर्ग के लोग अपने आरक्षण को बटने नहीं देंगे बल्कि अपनी आबादी के अनुसार 57%आरक्षण लेकर रहेंगे इसके लिए सड़क पर उतर कर हम सभी लोग आंदोलन करेंगे ।




इस अवसर पर बड़ागांव ब्लॉक अध्यक्ष अवधेश रेड्डी, भरत प्रजापति, राजेश गुप्ता, रोशन पटेल ,पिंटू पटेल, प्रमोद पटेल, दिलीप प्रजापति, संदीप प्रजापति,राधेश्याम प्रजापति, सुधीर पटेल बृजेश मनोज सहित दर्जनों साथी उपस्थित रहे।

Thursday, January 3, 2019

सरदार सेना की मासिक समिक्षा बैठक सम्पन्न


वाराणसी। अपने एक साल मे किये गये कार्यों एवं सभी ब्लॉकों की समिक्षा के लिए सरदार सेना जिला इकाई वाराणसी के केन्द्रीय कार्यालय पर बैठक बुलाई गयी। इस दौरान जनवरी 2018 से लेकर दिसम्बर 2018 तक के संगठन द्वारा किये गये सभी कार्यों की समीक्षा की गयी। यह जानकारी बैठक की अध्यक्षता कर रहे सरदार सेना युवा जिलाध्यक्ष आशोक कुमार पटेल ने पत्रकारवार्ता के दौरान दी। 

उन्होंने बताया कि जिस प्रकार सरदार सेना अपने अटल इरादों के साथ पिछले वर्ष सरदार पटेल के विचारों पर कार्य कर रही थी और आगे भी सरदार पटेल के विचारधारा पर ही कार्यरत रही रहेगी। वहीं बैठक में मुख्य रूप से सरदार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. आर. एस. पटेल भी उपस्थित रहे। उन्होंने सभी पदाधिकारियों को नूतन वर्ष 2019 की शुभकामनाएं देते हुये आगे की रणनितियों पर गहन चर्चा किया साथ हीं आगामी कार्यक्रमों को लेकर सभी क्रांतिकारी पदाधिकारियों को उनकी जिम्मेदारीयों से अवगत कराया।

बैठक में मुख्य रूप से प्रदेश महासचिव सुरेश वर्मा, कार्यालय प्रभारी सुधीर सिंह पटेल, बड़ागांव ब्लॉक अध्यक्ष अवधेश कुमार रेड्डी, अरविन्द कुमार जिला उपाध्यक्ष, धर्मदास पटेल जिला सचिव, डॉ. आरके वर्मा जिला महासचिव, राजकुमार पटेल जिला अध्यक्ष किसान मोर्चा, सुरेश पटेल, प्रदीप पटेल, पवन कुमार, भरत लाल प्रजापति, मुन्ना लाल , रामजी पटेल, शितला पटेल, रणविजय पटेल, रवि पटेल, अमन वर्मा, विशाल कुमार, अशोक कुमार, राजकुमार पटेल, दिनेश कुमार, सहित कई ब्लॉकों के पदाधिकारी मौजूद रहे।



Wednesday, January 2, 2019

सरदार सेना वार्षिकोत्सव में जमकर झूमे सरदारवादी

वाराणसी। सरदार सेना के एक वर्ष पूरे हो जाने पर जनपद स्थित तेलियाबाग सरदार वल्लभ भाई पटेल धर्मशाला में एक कर्यक्रम का आयोजन किया गया। जिसमें प्रदेश के सभी जिलों से क्रांतिकारी सरदारवादियों का महा जुटान लगा रहा। इस दौरान सरदार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ आर एस पटेल ने सरदार विजन पत्रिका का भी विमोचन किया। आयोजन में गुजरात सेना आये अनामत आंदोलन में मुख्य भूमिका निभाने वाले जतिन भाई पटेल ने सरदारवादियों को एक अच्छे  कैडर के गुर सिखाए। सभी ने यह सपत लिया कि अब हम सरदार के सपनो का भारत बना के रहेंगे।